चारू
खलनायकों को आदर्श बताया जाता है।
अवसादों को भी हर्ष बताया जाता है।।
राष्ट द्रोह के पतित कृत्य में लगे हुओं की-
दुर्गति को अब उत्कर्ष बताया जाता है।।
धधके बस्तर मणिपुर या कश्मीर हमारा।
सुधा श्रोत के मध्य रक्त की कैसी धारा।
लोकतंत्र सबका सम्यक उत्कर्ष करें जब
कौन डालता लोगों के आँचल अंगारा।।
युव-शोणित में वैमनस्य का गरल घोलते।
मधु को कटु कठोर प्रस्तर को तरल बोलते।
देखो तो कैसे पथदर्शक मिले हैं हम को।
प्रीतिपंथ को कठिन कुटिल पथ ।सरल बोलते।।
हमारी चिंताओं की चिंता कौन करे।
जंगल में काँटों की निंदा कौन करे।
प्रश्नों के हम शव लेकर बैठे हैं।
मुर्दों को अब फिर है जिंदा कौन करे।