शिक्षा · साहित्य · चिंतन · सेवाA life devoted to learning and expression
मुक्तक · 23/10/2026

प्रणय

नयन के द्वार पर बैठे हुए जल बिंदु से पूछो। गगन पर या चमकते उस शरद के इंदु से पूछो। हमारी भावनाओं पर तुम्हारा है असर कितना । न हो तो जा किसी गहरे अपरमित सिंधु से पूछो।। प्रणय के गीत गाऊं या विनय के बोल लिख दूं मैं। तुम्हारे साथ का सांसों पे अपनी मोल लिख दूं मैं कला सो ssलह लिए चंदा तुम्हारे सामने क्या है। कहो तो नूर तेरा चांदनी से तौल लिख दूं मैं।।