प्रणय
नयन के द्वार पर बैठे हुए जल बिंदु से पूछो।
गगन पर या चमकते उस शरद के इंदु से पूछो।
हमारी भावनाओं पर तुम्हारा है असर कितना ।
न हो तो जा किसी गहरे अपरमित सिंधु से पूछो।।
प्रणय के गीत गाऊं या विनय के बोल लिख दूं मैं।
तुम्हारे साथ का सांसों पे अपनी मोल लिख दूं मैं
कला सो ssलह लिए चंदा तुम्हारे सामने क्या है।
कहो तो नूर तेरा चांदनी से तौल लिख दूं मैं।।